Vaidik Panchang 14082025 Visiting Temple is Essential

🙏🏻 हर हर महादेव🙏🏻
🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️
🌤️ *दिनांक – 14 अगस्त 2025*
🌤️ *दिन – गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ऋतु*
🌤️ *मास – भाद्रपद ( गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार श्रावण)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – षष्ठी 15 अगस्त रात्रि 02:07 तक तत्पश्चात सप्तमी*
🌤️ *नक्षत्र – रेवती सुबह 09:06 तक तत्पश्चात अश्वनी*
🌤️ *योग – शूल दोपहर 01:12 तक तत्पश्चात गण्ड*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 02:20 से शाम 03:56 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:18*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:08*
👉 *दिशाशूल – दक्षिण दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – रांधन षष्ठी, पंचक (समाप्त : सुबह 09:06 तक*
💥 *विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
      🕉️~*वैदिक पंचांग* ~🕉️

🌷 *कृष्ण नाम के उच्चारण का फल* 🌷
➡ *15 अगस्त 2025 शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (स्मार्त) एवं 16 अगस्त 2025 शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (भागवत)*
🙏🏻 *ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार*
*नाम्नां सहस्रं दिव्यानां त्रिरावृत्त्या चयत्फलम् ।।*
*एकावृत्त्या तु कृष्णस्य तत्फलं लभते नरः । कृष्णनाम्नः परं नाम न भूतं न भविष्यति ।।*
*सर्वेभ्यश्च परं नाम कृष्णेति वैदिका विदुः । कृष्ण कृष्णोति हे गोपि यस्तं स्मरति नित्यशः ।।*
*जलं भित्त्वा यथा पद्मं नरकादुद्धरेच्च सः । कृष्णेति मङ्गलं नाम यस्य वाचि प्रवर्तते ।।*
*भस्मीभवन्ति सद्यस्तु महापातककोटयः ।* *अश्वमेधसहस्रेभ्यः फलं कृष्णजपस्य च ।।*
*वरं तेभ्यः पुनर्जन्म नातो भक्तपुनर्भवः । सर्वेषामपि यज्ञानां लक्षाणि च व्रतानि च ।।*
*तीर्थस्नानानि सर्वाणि तपांस्यनशनानि च ।* *वेदपाठसहस्राणि प्रादक्षिण्यं भुवः शतम् ।।*
*कृष्णनामजपस्यास्य कलां नार्हन्ति षोडशीम् । (ब्रह्मवैवर्तपुराणम्, अध्यायः-१११)*
🙏🏻 *विष्णुजी के सहस्र दिव्य नामों की तीन आवृत्ति करने से जो फल प्राप्त होता है; वह फल ‘कृष्ण’ नाम की एक आवृत्ति से ही मनुष्य को सुलभ हो जाता है। वैदिकों का कथन है कि ‘कृष्ण’ नाम से बढ़कर दूसरा नाम न हुआ है, न होगा। ‘कृष्ण’ नाम सभी नामों से परे है। हे गोपी! जो मनुष्य ‘कृष्ण-कृष्ण’ यों कहते हुए नित्य उनका स्मरण करता है; उसका उसी प्रकार नरक से उद्धार हो जाता है, जैसे कमल जल का भेदन करके ऊपर निकल आता है। ‘कृष्ण’ ऐसा मंगल नाम जिसकी वाणी में वर्तमान रहता है, उसके करोड़ों महापातक तुरंत ही भस्म हो जाते हैं। ‘कृष्ण’ नाम-जप का फल सहस्रों अश्वमेघ-यज्ञों के फल से भी श्रेष्ठ है; क्योंकि उनसे पुनर्जन्म की प्राप्ति होती है; परंतु नाम-जप से भक्त आवागमन से मुक्त हो जाता है। समस्त यज्ञ, लाखों व्रत तीर्थस्नान, सभी प्रकार के तप, उपवास, सहस्रों वेदपाठ, सैकड़ों बार पृथ्वी की प्रदक्षिणा- ये सभी इस ‘कृष्णनाम’- जप की सोलहवीं कला की समानता नहीं कर सकते*
🌷 *ब्रह्माण्डपुराण, मध्यम भाग, अध्याय 36 में कहा गया है :*
*महस्रनाम्नां पुण्यानां त्रिरावृत्त्या तु यत्फलम् ।*
*एकावृत्त्या तु कृष्णस्य नामैकं तत्प्रयच्छति ॥१९॥*
🙏🏻 *विष्णु के तीन हजार पवित्र नाम (विष्णुसहस्त्रनाम) जप के द्वारा प्राप्त परिणाम ( पुण्य ), केवलएक बार कृष्ण के पवित्र नाम जप के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।*
पंचक शुरू- 10 अगस्त 2025, रविवार को रात 02:11 बजे

पंचक खत्म- 14 अगस्त 2025, बृहस्पतिवार को सुबह 09:06 बजे

         🕉️ *~ वैदिक पंचांग ~* 🕉️

राम ते अधिक राम कर दासा।

देखिए भगवान् उनका नाम, उनका रूप, उनकी लीला, उनके धाम, उनके संत इतनी वस्तुएँ ऐसी हैं जिनमें सब में सबका निवास है। एक-एक शब्द पर ध्यान दीजिए। सब में सबका निवास है। यानी इन सबमें कोई छोटा बड़ा नहीं है। जो शक्ति, जो गुण, भगवान् में हैं, वहीं महापुरुष में हैं, वही उनके नाम में हैं, वहीं उनके गुण में हैं, वही उनकी लीलाओं में हैं, वही उनके धाम हैं, सभी चीजें सभी में हैं बराबर-बराबर प्वाइन्ट वन परसेंन्ट का अन्तर नहीं। इस विज्ञान को बहुत सावधानी से सदा मस्तिष्क में रखना है जब तक भगवत्प्राप्ति न हो जाय।

अपराध तो बहुत से होते हैं, आप लोगों ने सुने होंगे। बहुत से पाप हैं थोड़े बहुत तो जानते ही होंगे, झूठ बोलना पाप है, जैसे चोरी करना पाप है इत्यादि। इसी प्रकार महापाप भी होते हैं। पाँच प्रकार के महापाप होते हैं- सोने की चोरी करना आदि। लेकिन ये सब पाप भी बहुत छोटे हैं सबसे बड़ा पाप होता है नामापराध। उनके धाम, उनके नाम, उनके रूप, उनकी लीला, उनके धाम, उनके संत इन सबमें किसी को छोटा बड़ा मानना ये नामापराध है। समस्त पापों का प्रायश्चित शास्त्रों में लिखा है। आपने ब्रह्म हत्या कर डाला, गोहत्या किया, झूठ बोले, कोई पाप किया, सबका प्रायश्चित भी लिखा है शास्त्रों में कि ऐसा-ऐसा कर लो, तो प्रायश्चित हो जायेगा अर्थात् तुम उस पाप से मुक्त हो जाओगे। लेकिन नामापराध का कोई प्रायश्चित शास्त्रों में नहीं लिखा। अक्षम्य अपराध है। और ये ही एक अपराध ऐसा है उसके कारण अनादिकाल से अब तक अनन्त बार हम लोगों ने भगवान् को देखा, संतों को देखा, नाम भी लिये, गुण भी गाये, लीलायें भी गाईं किन्तु सब निरर्थक हो गया। जब तक नामापराध के विज्ञान को हम न समझेंगे और इससे न बचेंगे, तब तक हमारी सारी कमाई उसी प्रकार व्यर्थ हो जायेगी, जैसे कि बड़े शहर में आप अपने जीवन की सारी कमाई चौरस्ते पर रख कर, रात को सो जायें। सबेरे उसको उठाने के लिये जायें तो ज़ीरो बटा सौ मिले।

उस नामापराध के बारे में बातें तो और भी बहुत सी हैं लेकिन सबसे प्रमुख बात यही है कि भगवत्सम्बन्धी विषय में और भगवत्सम्बन्धी विषय कितना है, जितना मैंने बताया, भगवान् के अनन्त नाम, अनन्त रूप, अनन्त लीला, अनन्त गुण, अनन्त धाम, अनन्त संत, इनमें किसी को छोटा बड़ा नहीं मानना है। रसिकों ने छोटा बड़ा लिख दिया है, लेकिन रसिकों की बात समझने के लिये आपकी बुद्धि पर्याप्त नहीं, कोई रसिक ही आपको समझा सकता है तुलसीदास ने भगवान् को छोटा कर दिया-

मोरे मन प्रभु अस विश्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा।
कबहुँ बड़ बह्म राम ते नाम बड़ वरदायक वरदानि।
कहँ लगि कहहुँ नाम प्रभुताई, राम न सकहिं नाम गुन गाई।
राम भालुकपि कटक बटोरा, सेतु हेतु श्रम कीन्ह न थोरा।

एक छोटे से पुल को बनाने के लिये रामेश्वरम् में लंका के लिये इतनी सारी सेना इकट्ठी की और-
नाम लेत भवसिन्धु सुखाही। करहु विचार सुजन मन माहीं।।

भावार्थ ये कि नाम को बड़ा बताया गया, संत को बड़ा बताया गया, किन्तु ये बात है नहीं। ये तो व्यवहारिक बात है। हमारे यहाँ दो प्रकार के सिद्धान्त होते हैं- एक व्यवहारिक, एक पारमार्थिक। वो पारमार्थिक सिद्धान्त तो ये है कि-

समुझत सरिस नाम अरु नामी।

यानी भगवान्, उनका नाम, उनके रूप, उनकी लीला, उनके गुण, उनके धाम, उनके संत सब बराबर हैं। छोटा बड़ा कोई नहीं लेकिन उस कानून में एक सब-सेक्शन है लेकिन चूँकि हमारा विशेष स्वार्थ भगवान् से हल नहीं हो सकता। इसलिये अब दो ही बचे, नाम रूप, लीला, गुण, धाम और एक सन्त तीसरा भगवान्, उससे हमारा काम नहीं बनेगा चूँकि भगवान् से डायरेक्ट कॉन्टैक्ट नहीं हो सकता। क्योंकि भगवान् निर्मल मन को स्वीकार करता है-

निर्मल मन जन सो मोहिं पावा।
मोहि कपट छल छिद्र न भावा।।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्।।

उनको निर्मल मन अच्छा लगता है, अगर समल मन अच्छा लगता, तो हम लोगों के बुरे दिन क्यों होते? हम लोगों का काम बन गया होता। हम लोगों का मन गन्दा है इसलिये हमारा काम नहीं बना। तुलसी, सूर, मीरा, नानक, तुकाराम, उनका मन निर्मल था। इसलिये उनका काम बन गया। उनके लिए राम ने सब कुछ देकर, उनकी माया निवृत्ति, परमानन्दप्राप्ति सब समस्यायें हल कर दीं। और हमारी एक भी समस्या हल नहीं हुई और बढ़ती जा रही है। ठीक है।

तो भगवान् से हमारा विशेष लाभ मायाबद्ध अवस्था में नहीं हो सकता। हमारा प्रमुख और पहला लाभ मिलेगा महापुरुष के द्वारा महापुरुष ही बतायेगा इस राज को भी कि देखो जी! ये भगवान् के नाम, उनके रूप, उनकी लीला, उनके गुण, उनके धाम उनके संत ये सब बराबर हैं और तुम्हें सबसे पहले काम पड़ेगा महापुरुष से। उसके बिना काम नहीं बनेगा। ये बात भी कौन बतायेगा- महापुरुष। वो चाहे पुस्तक में लिखे, चाहे जबानी बतावे, चाहे जैसे भी। ईश्वरीय जगत् के बहुत सूक्ष्म और रहस्यमय कानून हैं उनको तो उन्हीं की गवर्नमेन्ट वाले जानते हैं और कौन बतायेगा। हम लोग तो बस, इतना समझ लेंगे, हाँ, भई ठीक है चाहे भगवान् से प्यार करो, चाहे उसके संत से प्यार करो, चाहे उसके नाम से प्यार करो, चाहे उनके गुण से प्यार करो यानी वो सब शुद्ध हैं। तो शुद्ध से प्यार करने से शुद्ध हो जायेगा सीधी सी अकल की बात है। ज्यादा खोपड़ी लगाने की जरूरत नहीं है।

माया के क्षेत्र में तीन हैं- तामस, राजस, सात्विक। या तो हम इनसे प्यार करेंगे और अगर इनसे ऊपर गये- मायातीत जगत् में, दो पर्सनैलिटी हैं। महापुरुष और भगवान्। इनमें किसी से प्यार करेंगे और जिससे प्यार करेंगे, उसकी प्रॉपर्टी हमें मिल जायेगी।

जैसे एक गन्दा कपड़ा है। गन्दे कपड़े को गन्दे पानी में डालेंगे और गन्दा होगा। और अगर गन्दे कपड़े को शुद्ध पानी में धोओगे, तो मैल धुल जायेगा। इसी प्रकार यदि हम अपने मन को मायातीत पर्सनैलिटी में अटैच्ड करेंगे, आसक्त करेंगे तो हमारा अतःकरण शुद्ध हो जायेगा और माया के अण्डर वाले में मन को आसक्त करेंगे तो और गन्दा हो जायेगा। ये सीधा सा उसूल है-
यान्ति देवव्रता देवान्पितॄन्यान्ति पितृव्रताः।
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपिमाम्।।
(गीता)

भगवान् ने अर्जुन से कहा- भई! ये तो कुछ अकल लगाने की बात है नहीं। तुम देवताओं से प्यार करो, देवताओं का लोक मिल जायेगा, भूतों से प्यार करो भूत लोक मिल जायेगा। और मुझसे प्यार करोगे तो मैं मिल जाऊँगा। तुम्हें क्या चाहिए? तुम सोच लो, और जो कुछ चाहिए उसी एरिया वाले से प्यार कर लो। लेकिन प्यार करना पड़ेगा तुमको। कोई भी व्यक्ति बिना प्यार के जीवित नहीं रह सकता। अब तुम्हें क्या चाहिए? अपने ऐम को समझ लो। उसी हिसाब से प्यार कर लो, और प्यार करना सबको आता है। सिखाना भी नहीं है। क्या शास्त्र वेद बतायेगा? क्या शास्त्र में लिखा है? मैं तो चैलेन्ज करता हूँ, ऐसी कोई बात नहीं शास्त्र वेद में, जो आपको मालूम न हो कम से कम भगवान् के विषय में। देवताओं के विषय में बातें बड़ी-बड़ी हैं। उसमें तो बड़े कायदे कानून हैं लेकिन भगवान् के बारे में, महापुरुष के बारे में तो कुछ अकल लगाने की आवश्यकता ही नहीं। भोले बालक बन कर के सरैण्डर करना है, शरणागत होना है। बस प्यार करना है। कोई कायदा कानून नहीं।

न देश नियमस्तस्मिन् न काल नियमस्तथा।

कुछ भी नहीं, मन्त्र पढ़ो, ऐसे बैठो, ऐसे करो, कुछ नहीं। तुम पाखाने में लेटे रहो, बस प्यार करो उनसे। बस। न कोई जरूरत मन्दिर जाने की, न मस्जिद जाने की। ये सब कर्मकाण्ड में लिखा है, ये सब कायदे कानून जो हैं, देवताओं के यहाँ हैं, मनुष्यों के यहाँ हैं, ईश्वर के यहाँ नहीं।

तो सबसे पहला कदम चूंकि महापुरुष है, उसी से हमारा काम बनना है इसलिए उस व्यवहारिक दृष्टि से शास्त्रों में ऐसा कह दिया है कि महापुरुष का स्थान भगवान् से ऊँचा है। पावर में ऊँचा नहीं है। अरे! महापुरुष के पास क्या है? जो भगवान् के पास है, जो भगवान् ने दिया। वो उसके पास हो गया, क्या चीज़ अधिक है जो वो बड़ा कहलायेगा। अरे! हम ही लोग तो पहले मायाबद्ध थे। अब शरणागत हो गये तो भगवान् ने कृपा करके अपनी सारी पावर दे दी, कि लो बेटा, पूरी की पूरी जिस आनन्द में हम सदा लीन हैं तुम भी लो। जिस ज्ञान में हम सदा से युक्त हैं तुम भी लो। कुछ भी चीज़ भगवान् के पास है, सब दे रहा है, जैसे गुरु दे देता है शिष्य को सब कुछ। छिपाता नहीं है कुछ भी। उसी प्रकार भगवान् भी भक्त को सब कुछ दे देता है।

एक बार भक्त ने कहा- हम नहीं लेंगे। तो भगवान् ने कहा- जो कुछ तुम्हारी इच्छा हो माँगो। महाराज! ऐसा है कि आप हमारे स्वामी हैं न, तो सब चीज़ आप दे देंगे, और हम ले लेंगे तो बड़ा कन्फ्यूजन हो जायेगा। एक चीज़ ऐसी है जिसे हम चाहते भी नहीं है और उससे जरा अन्तर भी बना रहेगा भगवान् और महापुरुष में क्या अन्तर है वो क्या चीज़ है ?

जगद्व्यापार वर्जम्।
भोगमात्रसाम्यलिंगाच्च।

वेदव्यास ने इसके लिये एक ब्रह्म सूत्र बना दिया। सृष्टि करना और सृष्टि की देखभाल करना और सृष्टि का प्रलय करना ये वर्क महापुरुष नहीं करता। कर सकता है, पावर है, करता नहीं। ये अपना काम तुम ही सँभालो। हमारे जो शरणागत होंगे, उनकी देखभाल हम करेंगे। लेकिन असंख्य ब्रह्माण्ड की देखभाल का बवाल मैं नहीं पालता अपने सिर पर। तो भगवान् ने कहा- ठीक है ये काम हम ही कर लेंगे। ये काम हम तुमको नहीं देते, ये वर्क हम तुमको नहीं देते। फिर ये वर्क कोई अच्छा वर्क भी नहीं है क्योंकि अनन्तकोटि ब्रह्माण्ड में ४-५ अरब आदमी हैं और जबकि ४-५ अरब जीव तो एक छोटे से गढ्ढे में होते हैं। थोड़े से आदमी हैं उन आदमियों में से ४-५ लाख आदमी भी ऐसे नहीं हैं जो अच्छा ही अच्छा काम करें। यानी बुरा काम करने वाले अधिक हैं, बुरा चिन्तन करने वाले अधिक हैं। अच्छा चिन्तन करने वाले बहुत कम हैं, उसमें केवल अच्छा चिन्तन करे, ये तो महापुरुष ही कर सकता है। कुछ अच्छा, कुछ बुरा, मिक्श्चर कम्बाइंड चल रहा है सबका। कूड़ा कबाड़ा जो हमारा चिन्तन है, इस चिन्तन को भगवान् को नोट करना पड़ता हैं। अच्छा चिन्तन करें या बुरा सभी दर्ज होगा फाइल में। ये सारा डर्टी वर्क है वैसे तो। लेकिन सब उनके बच्चे हैं उनको करना पड़ेगा। क्योंकि अगर बुरे कर्म न नोट करे तो दण्ड नहीं मिलेगा और अगर दण्ड नहीं मिलेगा तो जीव सावधान नहीं होगा।

जो दुनियावी गवर्नमेन्ट है न। यहाँ भी दण्ड दिया जाता है न । दण्ड देने से क्या होता है? हम सावधान हो जाते हैं आगे से भविष्य में ऐसी गलती न करना, टिकिट लेकर गाड़ी में बैठना। अरे! एक बार हम ऐसे ही बैठे थे अनजाने में, सौ रुपया चार्ज देना पड़ा था हमको। तो इसी प्रकार ईश्वर ने कानून बनाये हैं और वे नोट न करें जीव के कर्म को, तो फिर जो दण्ड नहीं देगा, फिर हमको होश नहीं आयेगा। इतना दण्ड मिल रहा है सबको संसार में देखो। किसी के धन नहीं है किसी के पुत्र नहीं, किसी के पति नहीं, किसी के स्त्री नहीं, किसी के बेटा नहीं, किसी की प्रतिष्ठा नहीं, किसी का शरीर रोगी है, कोई कैसे, कोई कैसे, सब दुःखी हैं। एक क्षण को चैन नहीं है, सारे विश्व में, किसी एक आदमी को भी। चैलेन्ज है हमारा। ये ऑल राइट जो मुँह से बोला करते हैं सब बकवास है। जोकरी है। एक भी राइट नहीं है सब राँग है भीतर। लेकिन इतना दुःख पाने पर भी जीव ईश्वर की ओर मुड़ने में अभी आनाकानी कर रहा है। पड़ोसी के चला जायेगा ताश खेलने। क्या करें? बीबी खोपड़ा खाती है काँव-काँव करके, बेटे का अलग स्क्रू ढ़ीला है, बाप का एक स्क्रू अलग ढीला है। हम तो पागल हो जायेंगे। मर जायें तो अच्छा। यहाँ तक पहुँच जाते हैं आप लोग। तो इससे बचने का जो उपाय असली है ईश्वर शरणागति वही नहीं करते, बाकी सब उपाय कर लेते हैं। चलो पिक्चर देख आवें, चलो नावेल पढ़ें, चलो दोस्त के यहाँ हो आयें, अनेक उपाय सोचते हैं लेकिन वो उपाय है ही नहीं। इस उपाय से क्या काम चलेगा? आप जहाँ जहाँ जायेंगे वो चिन्तन का भूत आपकी खोपड़ी पर सवार रहेगा इससे बच नहीं सकते आप। दण्ड विधान भी हमारे लिये लाभदायक है और यदि कभी हमने अच्छा कर्म किया, एक आँसू बहा दिया श्यामसुन्दर के लिये, अगर ये नोट न करे तो अगले जन्म में हमको इसका फल नहीं मिलेगा बड़ा भारी लॉस हो जायेगा हमारा हर जन्म में जीरो से स्टार्ट करेंगे तो कब पहुँचेंगे। अगर हम दस मील तक चल चुके हैं इलाहाबाद की ओर तो अगले जन्म में दस मील पर खड़ा कर दिया जायेगा। अब २५ मील रह गया। फिर हम दस मील और आगे बढ़ गये इस जन्म में अब १५ मील रह गया। तो इस प्रकार हमारे अच्छे कर्मों का फल न देगा तो-

अनेकजन्मसंसिद्धिस्ततो यांति परमां गतिम्।

के अनुसार अनेक जन्म के बाद जीव को भगवत्प्राप्ति होती है इसी क्रम से। अरे, हमारे यू. पी. में हाई स्कूल पास किया, अब कहीं चले जाओ एम. पी. में इण्टरमीडिएट में दाखिला हो जायेगा। कहीं एम. पी. वाले भी कहें हमारे यहाँ भी शुरू कीजिए दर्जा एक से, तब तो बेचारा मर गया।

तो इस प्रकार महापुरुष इस वर्क को नहीं लेता। अब आप समझ गये कि महापुरुष की और भगवान् की पावर्स में कोई अन्तर नहीं। ज्ञानानन्द दोनों का एक है। लेकिन चूँकि भगवान् का ये कानून है कि महापुरुष की शरणागति और महापुरुषों की बताई हुई साधना से ही काम बनेगा आपका। इसलिये महापुरुषों ने या शास्त्र वेदों ने महापुरुष का स्थान भगवान् से ऊँचा बता दिया। तो ये व्यवहार की दृष्टि है, अपने मतलब की दृष्टि है भई, हमारा काम तो महापुरुष से बनेगा। उसने अन्तःकरण शुद्धि का उपाय बताया और लेबर इतना सारा किया उसने, अन्तःकरण शुद्धि तक पहुँचाया उसने उसके बाद जब दिव्य वस्तु देने का नम्बर आया, तब भी आप (भगवान्) अलग हो गये। वहाँ जाओ, मैं नहीं देता। फिर महापुरुष के पास जाना पड़ा। उसी ने अन्तःकरण शुद्ध कराया यानी बर्तन बनाया और उसी ने उसमें सामान दिया। जब ये सब हो गया तब भगवान् कहते हैं, लो मैं आ गया। कहिए क्या सेवा करें आपकी ? इसका मतलब तो भगवान् बने-बने के साथी हैं।

जैसे एक बाप ने लड़की को पाला, पोसा, लिखाया, पढ़ाया, कलावती गुणवती बनाया, १८ साल की जब लड़की तैयार हो गई अपटूडेट, तो एक पति आया, सात चक्कर लगाये और ले भागे। तो सारी मेहनत तो बाप ने की। पतिदेव ने क्या किया? वो जो बने बनाये के साथी हैं।

उसी प्रकार सारा परिश्रम, सारी सेवा, सारी मेहनत महापुरुष करता है। इसलिये कह दिया गया कि-

राम ते अधिक राम कर दासा।

वस्तुतः कोई भेद नहीं।

तो आप लोग कहेंगे ठीक है यहाँ पर कौन सा महापुरुष है, था, कौन सी ऐसी चीज़ है, जो आप कहते हैं, जैसे भगवान् के अवतार काल में आप मिलते, ऐसे यहाँ भी चीज़ है। एक बात तो ये कि आप यह भी कह सकते हैं कि इसमें कोई महापुरुष ही बैठा हो। पहला प्वाइन्ट तो यही है। आप यह नहीं सिद्ध कर सकते, आपके पास कोई पैमाना नहीं है कि इतने के बीच में कोई महापुरुष भी है या नहीं है। अगर आप कहें कि मेरी बुद्धि में कोई जँचता नही है कि महापुरुष है। तुम्हारी बुद्धि में नहीं जँचता, ये क्या मतलब? तुम्हारी बुद्धि अभी कमजोर है न। परिपूर्ण तो नहीं है, सर्वज्ञ तो नहीं है, हाँ, हाँ सर्वज्ञ तो नहीं है अरे! तुम अपने बीबी बाप बेटे को नहीं समझ सके अभी तक तुम महापुरुष को क्या समझोगे, हूँ। कौन समझेगा?

प्रवचनांश-भक्तियोगरसावतार जगद्गुरूत्तम १००८ स्वामि श्री कृपालु जी महाराज

*”🕉️मंदिर जाना जरूरी है🕉️🙏”*

*1.पहला कारण—–:*
मंदिर जाना इसलिए जरूरी है कि वहां जाकर आप यह सिद्ध करते हैं कि आप देव शक्तियों में विश्वास रखते हैं तो देव शक्तियां भी आपमें विश्वास रखेंगी। यदि आप नहीं जाते हैं तो आप कैसे व्यक्त करेंगे की आप परमेश्वर या देवताओं की तरफ है.? यदि आप देवताओं की ओर देखेंगे तो देवता भी आपकी ओर देखेंगे। और यह भाव मंदिर में देवताओं के समक्ष जाने से ही आते हैं।

*2.दूसरा कारण—–:*
अच्छे मनोभाव से जाने वाले की सभी तरह की समस्याएं प्रतिदिन मंदिर जाने से समाप्त हो जाती है। मंदिर जाते रहने से मन में दृढ़ विश्वास और उम्मीद की ऊर्जा का संचार होता है। विश्वास की शक्ति से ही समृद्धि, सुख, शांति और कल्याण की प्राप्ति होती है।।

*3.तीसरा कारण—–:*
यदि आपने कोई ऐसा अपराध किया है कि जिसे आप ही जानते हैं तो आपके लिए प्रायश्चित का समय है। आप क्षमा प्रार्थना करके अपने मन को हल्का कर सकते हैं। इससे मन की बैचेनी समाप्त होती है और आप का जीवन फिर से पटरी पर आ जाता है।।

*4.चौथा कारण—–:*
मंदिर में शंख और घंटियों की आवाजें वातावरण को शुद्ध कर मन और मस्तिष्क को शांत करती हैं। धूप और दीप से मन और मस्तिष्क के सभी तरह के नकारात्मक भाव हट जाते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।।

*5.पांचवां कारण—–:*
मंदिर के वास्तु और वातावरण के कारण वहां सकारात्मक उर्जा ज्यादा होती है। प्राचीन मंदिर ऊर्जा और प्रार्थना के केंद्र थे।
हमारे प्राचीन मंदिर वास्तुशास्त्रियों ने ढूंढ-ढूंढकर धरती पर ऊर्जा के सकारात्मक केंद्र ढूंढे और वहां मंदिर बनाए। मंदिर में शिखर होते हैं।शिखर की भीतरी सतह से टकराकर ऊर्जा तरंगें व ध्वनि तरंगें व्यक्ति के ऊपर पड़ती हैं। ये परावर्तित किरण तरंगें मानव शरीर आवृत्ति बनाए रखने में सहायक होती हैं।व्यक्ति का शरीर इस तरह से धीरे-धीरे मंदिर के भीतरी वातावरण से सामंजस्य स्थापित कर लेता है। इस तरह मनुष्य असीम सुख का अनुभव करता है।।

*6.छटा कारण——:*
मंदिर में उपस्थित व्यक्ति के मन में चंचलता चपलता कम होती है, और पवित्रता के विचार ज्यादा प्रबल होते हैं, चाहे वह ईश्वर के डर से या फिर ईश्वर के प्रति प्रेम व श्रद्धा के कारण। लेकिन इस तरह का निश्चल मन अपने आसपास के वातावरण को पवित्र बनाता है, इसलिए मंदिर में स्वत ही सकारात्मकता पवित्रता वाली ऊर्जा कुछ ज्यादा होती है जिसका लाभ वहां जाने वाले प्रत्येक व्यक्तियों को मिलता है।।

*अतः मंदिर जरूर जाएं और अपने साथ अपने बच्चों को भी लेकर जाएं, उन्हें भी अपनी संस्कृति व परंपराओं से अवगत करायें 🙏*
          
*श्री राधे  हरे कृष्ण🙏*
*जय श्री राधेकृष्ण🙏*
🙏🌹🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🌷🙏

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष

आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म 14 को हुआ है। ऐसे व्यक्ति अधिकांशत: मितभाषी होते हैं। कवि, कलाकार, तथा अनेक विद्याओं के जानकार होते हैं। आपमें गजब की आकर्षण शक्ति होती है। आपमें लोगों को सहज अपना बना लेने का विशेष गुण होता है। 14 का अंक आपस में मिलकर 5 होता है। 5 का अंक बुध ग्रह का प्रतिनिधि करता है। अनजान व्यक्ति की मदद के लिए भी आप सदैव तैयार रहते हैं। आपमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना मुश्किल है। अर्थात अगर आप अच्छे स्वभाव के व्यक्ति हैं तो आपको कोई भी बुरी संगत बिगाड़ नहीं सकती। अगर आप खराब आचरण के हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सुधार नहीं सकती। लेकिन सामान्यत: 14 तारीख को पैदा हुए व्यक्ति सौम्य स्वभाव के ही होते हैं।

शुभ दिनांक : 1, 5, 7, 14, 23

शुभ अंक : 1, 2, 3, 5, 9, 32, 41, 50

शुभ वर्ष : 2030, 2032, 2034, 2050, 2059, 2052


ईष्टदेव : देवी महालक्ष्मी, गणेशजी, मां अम्बे।

शुभ रंग : हरा, गुलाबी जामुनी, क्रीम



जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
दाम्पत्य जीवन में मधुर वातावरण रहेगा। अविवाहित भी विवाह में बंधने को तैयार रहें। यह वर्ष आपके लिए सफलताओं भरा रहेगा। अभी तक आ रही परेशानियां भी इस वर्ष दूर होती नजर आएंगी। परिवारिक प्रसन्नता रहेगी। संतान पक्ष से खुशखबर आ सकती है। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए यह वर्ष निश्चय ही सफलताओं भरा रहेगा। व्यापार-व्यवसाय में प्रगति से प्रसन्नता रहेगी।


*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)*
*आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। आपको काम को लेकर कुछ समस्याएं बनी हुई थी, तो वह भी दूर होगी। आप उन्नति की राह पर आगे बढ़ेंगे। संतान भी आपके काम में आपका पूरा साथ देगी। आपके अंदर एक नई ऊर्जा विराजमान रहेगी। कार्यक्षेत्र में आपको काम के लिए कोई पुरस्कार मिल सकता है। आपको वाहनों के प्रयोग से आपको सावधान रहना होगा। यदि आपने किसी को धन उधार दिया था, तो वह आपको वापस मिल सकता है।*

*वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
*आज का दिन आपके लिए आय को बढ़ाने वाला रहेगा। आपको किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा, जो जातक नौकरी की तैयारी में लगे हैं, उन्हें कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। आप दिल से लोगों का भला सोचेंगे, लेकिन लोग इसे आपका स्वार्थ समझ सकते हैं। घूमने-फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। आपकी कुछ खास लोगों से मुलाकात होगी। आपका कोई प्रॉपर्टी से संबंधित मामला फाइनल होगा।*
*मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)*
*आज का दिन आपके लिए सामान्य रहने वाला है। आप बहुत कुछ करने की कोशिश करेंगे, लेकिन कामों में उलझनें रहने से आपका मन परेशान रहेगा। टेंशन भी आपको भरपूर हो सकती है। आपको भागदौड़ अधिक रहेगी, क्योंकि आप एक साथ काम करने की सोचेंगे। विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के मार्गं प्रशस्थ होंगे। आप किसी नए बिजनेस में भी हाथ आजमाने की कोशिश कर सकते हैं। पार्टनर पर आपको पूरी निगरानी बनाकर रखनी होगी।*

*कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
*आज आपका मन किसी बात को लेकर परेशान रहेगा, जिससे आपका काम करने का भी मन नहीं करेगा। आपको काम को लेकर थकान भी अधिक रहेगी। जीवनसाथी आपके लिए कोई सरप्राइस प्लान कर सकते हैं। यदि आपने बिजनेस में कोई बड़ा जोखिम उठाया, तो उससे आपको नुकसान होने की संभावना है। आपको अपनी शारीरिक समस्या को छोटा नहीं समझना है। आप कहीं घूमने-फिरने जाने की तैयारी में लगे हैं, तो फिर सामानों पर पूरा ध्यान दें।*

*सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
*आज का दिन राजनीति में कार्यरत लोगों के लिए बढ़िया रहने वाला है, उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। परिवार में किसी सदस्य से आपको कोई निराशाजनक सूचना सुनने को मिलेगी। जीवनसाथी से बेवजह के लड़ाई झगड़ा बढ़ सकते हैं। आपको अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर खर्च करना होगा, क्योंकि खर्च बढ़ने से आपकी टेंशन भी बढ़ेगी। इनकम को बढ़ाने के साधनों पर ध्यान दें।*

*कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
*आज का दिन आपके लिए सेहत के लिहाज से कमजोर रहने वाला है। आपको बाहर के खाने-पीने में थोड़ी सावधानी बरतनी होगी। ऑफिस में आपको काम को लेकर टेंशन अधिक रहेगी। आप अपने परिवार में किसी सदस्य से वाद-विवाद में ना पड़े। आपका कोई लेनदेन आपके लिए समस्या बन सकता है। आपको अपने किसी मित्र से लंबे समय बाद मिलने का मौका मिलेगा। एक साथ कई काम हाथ लगने से आपकी व्याकाग्रता बढ़ सकती है।*

*तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
*आज का दिन आपके लिए बिजनेस के मामले में कुछ उतार-चढ़ाव लेकर आएगा। आपकी योजनाएं आपके लिए समस्या खड़ी कर सकती है। आपको रुका हुआ धन मिलने से आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे लोगों को कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती हैं। आप अपने घर में पूजा पाठ का आयोजन कर सकते हैं, जिससे आपको मानसिक शांति मिलेगी। परिवार में किसी नए मेहमान का आगमन हो सकता है।*

*वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
*आज का दिन आपके लिए आत्मविश्वास से भरपूर रहने वाला है। आपका काम को लेकर आत्मविश्वास और गहरा रहेगा। घूमने-फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। आपको किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा। माताजी से आपकी किसी बात को लेकर वाद-विवाद खड़ा हो सकता है। आप पार्टनरशिप में कोई काम करेंगे, तो वह आपके लिए अच्छा रहेगा। आपके जीवनसाथी आपके साथ कंधे से कंधे मिलाकर चलेंगे, जिससे आपके सभी काम आसानी से पूरे होंगे।*

*धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)*
*आज का दिन आपके लिए मिश्रित रूप से फलदायक रहने वाला है। विद्यार्थियों को बौद्धिक और मानसिक बोझ से छुटकारा मिलेगा। आपका कोई पुराना लेनदेन आपके लिए समस्या बन सकता है। आपको किसी विरोधी की बातों में आने से बचना होगा। आप कोई इंवेस्टमेंट थोड़ा सोच समझकर करें, तो आपके लिए बेहतर रहेगा। आपको किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलकर खुशी होगी। आप किसी यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो आप कुछ समय रुक जाएं।*

*मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)*
*आज का दिन आपके लिए ऊर्जावान रहने वाला है। आप अपनी ऊर्जा को सही कामों में लगाएं और काम के साथ-साथ आप आराम के लिए भी समय निकाले। आपके किसी नए घर की खरीदारी की आप योजना बना रहे थे, तो उसके लिए कोई लोन अप्लाई कर सकते हैं। आपको राजनीति में किसी बड़े नेता से मिलने का मौका मिलेगा। नौकरी में आप अपने कामों पर पूरा ध्यान दें और आपको अपने आसपास रह रहे विरोधियों से सतर्क रहें। आप अपने कामों को बिगाड़ने की कोशिश करेंगे।*

*कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
*आज का दिन आपके लिए समस्याएं लेकर आने वाला है। आपको नौकरी में मनपसंद काम ना मिलने से आप परेशान रहेंगे। आपके आसपास में भी कोई वाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती हैं। किसी कानूनी मामले को लेकर आपको थोड़ा एतिहात बरतनी होगी। संतान के मन में पढ़ाई-लिखाई को लेकर यदि कोई समस्या चल रही है, तो उसे भी आप दूर करने के पूरी कोशिश करें। आप अपने घर परिवार में सदस्यों  के साथ समय व्यतीत करेंगे, जिससे पारिवारिक एकता बढ़ेंगी।*

*मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
*आज का दिन आपके लिए आवश्यकताओं की पूर्ति केलिए रहेगा। आप खुला खर्च करेंगे, जिससे आपको बाद में धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। वाहन की अकस्मात खराबी के कारण भी आपका धन खर्च बढ़ सकता है। बिजनेस के कुछ योजनाएं आपको अच्छा लाभ देगी। सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे लोगों को अपने कामों पर थोड़ा ध्यान देना होगा। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा हो सकता है।*

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“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton