हर हर महादेव
*🌞~ आज का वैदिक पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 22 जुलाई 2025*
*⛅दिन – मंगलवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2082*
*⛅अयन – दक्षिणायण*
*⛅ऋतु – वर्षा*
*⛅मास – श्रावण*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – द्वादशी प्रातः 07:05 तक तत्पश्चात् त्रयोदशी प्रातः 04:39 जुलाई 23 तक, तत्पश्चात् चतुर्दशी*
*⛅नक्षत्र – मृगशिरा शाम 07:24 तक तत्पश्चात् आर्द्रा*
*⛅योग – ध्रुव दोपहर 03:32 तक तत्पश्चात् व्याघात*
*⛅राहुकाल – शाम 04:06 से शाम 05:46 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय – 06:06*
*⛅सूर्यास्त – 07:26 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:41 से प्रातः 05:23 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:19 से दोपहर 01:13 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:25 जुलाई 23 से रात्रि 01:08 जुलाई 23 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण – भौम प्रदोष व्रत*
*⛅विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🔹वर्षा ऋतु का खास प्रयोग🔹*
*🔸 ५०० ग्राम हरड़ चूर्ण व ५० ग्राम सेंधा नमक का मिश्रण बना लें । (उसमें १२५ ग्राम सोंठ भी मिला सकते हैं ।) २-४ ग्राम यह मिश्रण दिन में १-२ बार लेने से ‘रसायन’ के लाभ प्राप्त होते हैं ।*
*🔸 नागरमोथा, बड़ी हरड़ और सोंठ तीनों को समान मात्रा में लेकर बारीक पीस के चूर्ण बना लें । इस चूर्ण से दुगनी मात्रा में गुड़ मिलाकर बेर समान गोलियाँ बना लें । दिन में ४-५ बार १-१ गोली चूसने से कफयुक्त खाँसी में राहत मिलती है ।*
*🔸 १ से ३ लौंग भूनकर तुलसी पत्तों के साथ चबाकर खाने से सभी प्रकार की खाँसी में लाभ होता है ।*
*🔸 वर्षा ऋतु में दमे के रोगियों की साँस फूले तो १०-२० ग्राम तिल के तेल को गर्म करके पीने से राहत मिलती है । ऊपर से गर्म पानी पियें ।*
*🔸 भोजन के पूर्व नींबू और अदरक के रस में सेंधा नमक डालकर पीने से मंदाग्नि व अजीर्ण में लाभ होता है ।*
*🔸 कब्ज की तकलीफ होने पर रात में त्रिफला चूर्ण लें । रात का रखा हुआ आधा से एक लीटर पानी सुबह बासी मुँह पीने से कब्ज का नाश होता है ।*
*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*
पांडवों की विजय का रहस्य..
महाभारत के युद्ध समाप्ति के बाद जब कुरुक्षेत्र के मैदान में दुर्योधन मरणासन अवस्था में अपनी अंतिम सासे ले रहा था तब भगवान श्री कृष्ण उससे मिलने गए. हालाँकि भगवान श्री कृष्ण को देख दुर्योधन क्रोधित नहीं हुआ परन्तु उसने श्री कृष्ण को ताने जरूर मारे।
श्री कृष्ण ने दुर्योधन से उस समय कुछ न कहा परन्तु जब वह शांत हुआ तब श्री कृष्ण ने दुर्योधन को उसकी युद्ध में की गई उन गलतियों के बारे में बताया जो वह न करता तो आज महाभारत का युद्ध वह जीत चुका होता, चूंकि दुर्योधन क्रोध व बिना सोच विचार के निर्णय लेता था।
कुरुक्षेत्र में लड़े गए युद्ध में कौरवों के सेनापति पहले दिन से दसवें दिन तक भीष्म पितामह थे, वहीं ग्याहरवें से पंद्रहवे तक गुरु दोणाचार्य ने ये जिम्मेदारी संभाली. लेकिन द्रोणाचार्य के मृत्यु के बाद दुर्योधन ने कर्ण को सेनापति बनाया. यही दुर्योधन के महाभारत के युद्ध में सबसे बड़ी गलती थी इस एक गलती के कारण उसे युद्ध में पराजय का मुख देखना पड़ा।
क्योकि कौरवों सेना में स्वयं भगवान शिव के अवतार मौजूद थे जो समस्त सृष्टि के संहारक है, अश्वत्थामा स्वयं महादेव शिव के रूद्र अवतार है और युद्ध के सोलहवें दिन यदि दुर्योधन कर्ण के बजाय अश्वत्थामा को सेनापति बना चुका होता तो शायद आज महाभारत के युद्ध का परिणाम कुछ और ही होता।
इसके साथ ही दुर्योधन ने अश्वथामा को पांडवो के खिलाफ भड़काना चाहिए था जिससे वह अत्यधिक क्रोधित हो जाए, परन्तु कहा जाता है की ”विनाश काले विपरीत बुद्धि ” दुर्योधन अपने मित्र प्रेम के कारण इतना अंधा हो गया था की अश्वत्थामा अमर है यह जानते हुए भी उसने कर्ण को सेनापति चुना।
कृपाचार्य अकेले ही एक समय में साठ हजार योद्धाओं का मुकाबला कर सकते थे लेकिन उनका भांजा (कृपाचार्य की बहन कृपी अश्वत्थामा की माँ थी) अश्वत्थामा में इतना समार्थ्य था की वह एक समय में बहत्तर हजार योद्धाओं के छक्के छुड़ा सकता था।
अश्वत्थामा ने युद्ध कौशल की शिक्षा केवल अपने पिता से ही गृहण नहीं करी थी बल्कि उन्हें युद्ध कौशल की शिक्षा इन महापुरषो परशुराम, दुर्वासा, व्यास, भीष्म, कृपाचार्य आदि ने भी दी थी, ऐसे में दुर्योधन ने अश्वत्थामा की जगह कर्ण को सेनापति का पद देकर महाभारत के युद्ध में सबसे बड़ी भूल करी थी।
भगवान श्री कृष्ण के समान ही अश्वत्थामा भी चौसठ कलाओं और अठारह विद्याओं में पारंगत था. युद्ध के अठारहवे दिन भी दुर्योधन ने रात्रि में उल्लू और कौवे की सलाह पर अश्वत्थामा को सेनापति बनाया था.उस एक रात्रि में ही ने पांडवो की बची लाखो सेनाओं और पुत्रों को मोत के घाट उतार दिया था।
अतः अगर दुर्योधन ऐसा पहले कर चुका होता था तो वह खुद भी न मरता और पांडवो पर जीत भी दर्ज कर चुका होता,हालाँकि यह काम अश्वत्थामा ने युद्ध की समाप्ति पर किया था.जब अश्वत्थामा का यह कार्य दुर्योधन को पता चला था तो उसे सुकून की मृत्यु प्राप्त हुई..!!
🙏🏻🙏🙏🏿जय श्री कृष्ण🙏🏽🙏🏼🙏🏾
“वृन्दावन” के नामकरण का इतिहास क्या है?
श्रीमद् भागवत में वृन्दावन का उल्लेख नन्दादिगोपों द्वारा श्रीकृष्ण सहित गोकुल को छोड़कर वृन्दावन गमन करने के समय आता है जहाँ कि श्रीकृष्ण द्वारा अनेकानेक अद्भुत लीलाएँ की गई थीं। श्रीकृष्ण जी के प्रपौत्र ने समस्त लीला स्थलियों को प्रतिष्ठापित किया तथा अनेक मन्दिर, कुण्ड एवं सरोवरों आदि की स्थापना की थी। सन् १५१५ ई. में श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु वृन्दावन पधारे। इसके अतिरिक्त स्वामी हरिदासजी, श्री हित हरिवंश, श्री निम्बार्काचार्य, श्रीलोकनाथ, श्री अद्वेताचार्यपाद, श्रीमान्नित्यानन्दपाद आदि अनन्य अनेकों संत-महात्माओं ने वृन्दावन में निवास किया था। गुप्तकालीन महाकवि कालिदास ने अपने महाकाव्य रघुवंश में कुबेर के चौत्ररथ नामक उद्यान से वृन्दावन की तुलना की हैं। १४वीं शताब्दी में वृन्दावन की विद्यमानता का उल्लेख अनेक जैन-ग्रन्थों में भी मिलता है।
वृन्दावन का नाम आते ही मन पुलकित हो उठता है। योगेश्वर श्री कृष्ण की मनभावन मूर्ति आँखों के सामने आ जाती है। उनकी दिव्य आलौकिक लीलाओं की कल्पना से ही मन भक्ति और श्रद्धा से नतमस्तक हो जाता है। वृन्दावन को ब्रज का हृदय कहते हैं। जहाँ श्री राधाकृष्ण ने अपनी दिव्य लीलाएँ की हैं। इस पावन भूमि को पृथ्वी का अति उत्तम तथा परम गुप्त भाग कहा गया है। पद्म पुराण में इसे भगवान का साक्षात शरीर, पूर्ण ब्रह्म से सम्पर्क का स्थान तथा सुख का आश्रय बताया गया है। इसी कारण से यह अनादि काल से भक्तों की श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है।
चैतन्य महाप्रभु, स्वामी हरिदास, श्री हितहरिवंश, महाप्रभु वल्लभाचार्य आदि अनेक गोस्वामी भक्तों ने इसके वैभव को सजाने और संसार को अनश्वर सम्पति के रुप में प्रस्तुत करने में जीवन लगाया है। यहाँ आनन्दप्रद युगलकिशोर श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा की अद्भुत नित्य विहार लीला होती रहती है।
वृन्दावन – पावन स्थली का नामकरण
इस संबंध में अनेक मत हैं। ‘वृन्दा’ तुलसी को कहते हैं। यहाँ तुलसी के पौधे अधिक थे। इसलिए इसे वृन्दावन कहा गया। वन्दावन की अधिष्ठात्री देवी वृन्दा हैं। कहते हैं कि वृन्दा देवी का मन्दिर सेवा कुंज वाले स्थान पर था। यहाँ आज भी छोटे-छोटे सघन कुंज हैं।
श्री वृन्दा देवी के द्वारा परिसेवित परम रमणीय विविध प्रकार के सेवाकुंजों और केलिकुंजों द्वारा परिव्याप्त इस रमणीय वन का नाम वृन्दावन है। यहाँ वृन्दा देवी का सदा-सर्वदा अधिष्ठान है। वृन्दा देवी श्रीवृन्दावन की रक्षयित्री, पालयित्री, वनदेवी हैं। वृन्दावन के वृक्ष, लता, पशु-पक्षी सभी इनके आदेशवर्ती और अधीन हैं। श्री वृन्दा देवी की अधीनता में अगणित गोपियाँ नित्य-निरन्तर कुंजसेवा में संलग्न रहती हैं। इसलिए ये ही कुंज सेवा की अधिष्ठात्री देवी हैं। पौर्णमासी योगमाया पराख्या महाशक्ति हैं। गोष्ठ और वन में लीला की सर्वांगिकता का सम्पादन करना योगमाया का कार्य है। योगमाया समाष्टिभूता स्वरूप शक्ति हैं। इन्हीं योगमाया की लीलावतार हैं- भगवती पौर्णमासीजी। दूसरी ओर राधाकृष्ण के निकुंज-विलास और रास-विलास आदि का सम्पादन कराने वाली वृन्दा देवी हैं।
वृन्दा देवी के पिता का नाम चन्द्रभानु, माता का नाम फुल्लरा गोपी तथा पति का नाम महीपाल है। ये सदैव वृन्दावन में निवास करती हैं। ये वृन्दा, वृन्दारिका, मैना, मुरली आदि दूती सखियों में सर्वप्रधान हैं। ये ही वृन्दावन की वनदेवी तथा श्रीकृष्ण की लीलाख्या महाशक्ति की विशेष मूर्तिस्वरूपा हैं। इन्हीं वृन्दा ने अपने परिसेवित और परिपालित वृन्दावन के साम्राज्य को महाभाव स्वरूपा वृषभानु नन्दिनी राधिका के चरणकमलों में समर्पण कर रखा है। इसीलिए राधिका जी ही वृन्दावनेश्वरी हैं।
ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार वृन्दा राजा केदार की पुत्री थी। उसने इन वन स्थली में घोर तप किया था। अत: इस वन का नाम वृन्दावन हुआ। कालान्तर में यह वन धीरे-धीरे बस्ती के रुप में विकसित होकर आबाद हुआ। इसी पुराण में कहा गया है कि श्रीराधा के सोलह नामों में से एक नाम वृन्दा भी है। वृन्दा अर्थात् राधा अपने प्रिय श्रीकृष्ण से मिलने की आकांक्षा लिए इस वन में निवास करती है और इस स्थान के कण-कण को पावन तथा रसमय करती हैं।
ब्रह्म वैवर्त पुराण में राजा कुशध्वज की पुत्री जिस तुलसी का शंखचूड़ से विवाह आदि का वर्णन है, तथा पृथ्वी लोक में हरिप्रिया वृन्दा या तुलसी जो वृक्ष रूप में देखी जाती हैं- ये सभी सर्वशक्तिमयी राधिका की कायव्यूहा स्वरूपा, सदा-सर्वदा वृन्दावन में निवास कर और सदैव वृन्दावन के निकुंजों में युगल की सेवा करने वाली वृन्दा देवी की अंश, प्रकाश या कला स्वरूपा हैं। इन्हीं वृन्दा देवी के नाम से यह वृन्दावन प्रसिद्ध है। वृन्दावन यानी भक्ति का वन अथवा तुलसी का वन।
आदि वृन्दावन इतिहास के पृष्ठों में
कुछ विद्वानों के अनुसार यह वह वृन्दावन नहीं है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने अपनी दिव्य लीलाओं के द्वारा प्रेम एवं भक्ति का साम्राज्य स्थापित किया था। ये लोग पौराणिक वर्णन के आधार लेकर कहते हैं कि वृन्दावन के समीप गोवर्धन पर्वत की विद्यमानता बताई है जबकि वह यहाँ से पर्याप्त दूरी पर है। कुछ लोग राधाकुण्ड को तो कुछ लोग कामा को वृन्दावन सिद्ध करते हैं। उस काल में यमुना वहीं होकर बहती थी। धीरे-धीरे यमुना का प्रवाह बदलता रहा। प्राचीन वृन्दावन के लुप्त प्राय: हो जाने से नवीन स्थल पर वृन्दावन बसाया गया। वृन्दावन कहीं भी रहा हो यह बात खोजी तथा तार्किकों के लिए छोड़ देना चाहिए। इन बातों से वृन्दावन की महिमा में कोई कमी नहीं आती।
पंद्रहवीं-सोलहवी शताब्दी में मदन-मोहनजी, गोविन्द देवजी, गोपीनाथजी, राधाबल्लभजी आदि मन्दिरों का निर्माण हो चुका था। औरंगजेब के शासन के समय जब वृन्दावन ही नहीं, ब्रज मण्डल के अनेक मन्दिरों को नष्ट किया जा रहा था तब वृन्दावन के अनेक श्रीविग्रहों के जयपुर आदि अन्यान्य स्थानों को भेज दिया गया था। वृन्दावन का नाम मोमिनाबाद रखने का प्रयत्न किया जो प्रचलित नहीं हो सका और सरकारी कागजातों तक ही सीमित रहा।
सन् १७१८ ई. से सन् १८०३ ई. तक तो ब्रजमण्डल में जाट राजाओं का आधिपत्य रहा, लेकिन सन् १७५७ ई. में अहमदशाह ने ब्रज मण्डल के मथुरा, महावन आदि तीर्थ स्थलों के साथ वृन्दावन में भी लूटपाट की थीं। सन् १८०१ ई. के अन्तिम काल में ब्रज मण्डल के अनेक क्षेत्रों पर पुन: जाट राजाओं का फिर से हुकूमत हो गई। उसके बाद ही वृन्दावन को पुन: प्रतिष्ठित होने का अवसर मिला।
वृंदावन यानी भगवान कृष्ण की पावन धरती। रसिकों की नगरी वृंदावन के राजा श्यामसुन्दर और महारानी श्री राधिका रानी हैं। इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि वृन्दावन का कण-कण रसमय है। सभी धामों से ऊपर है ब्रज धाम और सभी तीर्थों से श्रेष्ठ है श्री वृन्दावन धाम।
मथुरा से 12 किमी दूर उत्तर-पश्चिम में यमुना तट पर वृंदावन स्थित है। पद्म पुराण में इसे भगवान का साक्षात शरीर सुर्षा ब्रह्म से संपर्क का स्थान और सुख का आश्रय बताया गया है। यहां श्री कृष्ण और राधिक रानी की अनूठी रास लीला का रसास्वादन करने का अनुभव मिलता है। प्रभु की लीला जैसे ही यहां की प्राकृतिक छटा भी अद्भुत है। सावन भादों में यहां की हरियाली भी अतिमनभावन है। यहां उपस्थित मधुवन-निधिवन में प्रभु की प्रेम लीला की अनुभूति का सुख मिलता है।
मंदिरों की इस नगरी में प्रभु के नाम की जयकार चारों ओर गूंजती है। यहां भगवान कृष्ण के सैकड़ों मंदिर हैं। उनमें से प्रमुख बांके बिहारी जी का मंदिर, श्री रंग जी का मंदिर, श्री कृष्ण बलराम अंग्रेजों का मंदिर, पागल बाबा प्रेम मंदिर आदि प्रमुख हैं।
वृन्दावन की प्राकृतिक छटा देखने योग्य है। यमुना जी ने इसको तीन ओर से घेरे रखा है। यहाँ के सघन कुंजो में भाँति-भाँति के पुष्पों से शोभित लता तथा ऊँचे-ऊँचे घने वृक्ष मन में उल्लास भरते हैं। बसंत ॠतु के आगमन पर यहाँ की छटा और सावन-भादों की हरियाली आँखों को शीतलता प्रदान करती है, वह श्रीराधा-माधव के प्रतिबिम्बों के दर्शनों का ही प्रतिफल है।
वृन्दावन का कण-कण रसमय है। यहाँ प्रेम-भक्ति का ही साम्राज्य है। इसे गोलोक धाम से अधिक बढ़कर माना गया है। यही कारण है, कि हज़ारों धर्म-परायणजन यहाँ अपने-अपने कामों से अवकाश प्राप्त कर अपने शेष जीवन को बिताने के लिए यहाँ अपने निवास स्थान बनाकर रहते हैं। वे नित्य प्रति रासलीलाओं, साधु-संगतों, हरिनाम संकीर्तन, भागवत आदि ग्रन्थों के होने वाले पाठों में सम्मिलित होकर धर्म-लाभ प्राप्त करते हैं। वृन्दावन मथुरा भगवान कृष्ण की लीला से जुडा हुआ है। ब्रज के केन्द्र में स्थित वृन्दावन में सैंकड़ो मन्दिर है। जिनमें से अनेक ऐतिहासिक धरोहर भी है। यहाँ सैंकड़ों आश्रम और कई गौशालाऐं है। गौड़ीय वैष्णव, वैष्णव और हिन्दुओं के धार्मिक क्रिया-कलापों के लिए वृन्दावन विश्वभर में प्रसिद्ध है। देश से पर्यटक और तीर्थ यात्री यहाँ आते है। सूरदास,स्वामी हरिदास,चैतन्य महाप्रभु के नाम वृन्दावन से हमेशा के लिए जुड़े हुए है..!!
🙏🏽🙏🏿🙏जय श्री कृष्ण🙏🏻🙏🏾🙏🏼
*आज का राशिफल*
*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)*
*आज का दिन आपके लिए कुछ नए संपर्कों से लाभ लेकर आएगा। दांपत्य जीवन में खुशियां रहेगी। संतान को किसी नई नौकरी की प्राप्ति हो सकती है। आप कहीं वेकेशन पर जाने की प्लानिंग कर सकते हैं, लेकिन आप किसी को धन उधार देने से बचें, क्योंकि आपके उस धन के वापस आने की संभावना बहुत कम है। कारोबार में आपको अच्छा लाभ मिलेगा। आपकी सुख-समृद्धि बढ़ेगी। आप किसी नए घर के लिए यदि कोई लोन अप्लाई कर रहे थे, तो वह भी आपको मिल सकता है।*
*वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
*आज का दिन आपके लिए किसी निवेश को करने के लिए रहेगा। आप किसी नए काम की शुरुआत कर सकते हैं। प्रॉपर्टी को लेकर यदि कोई काम अटका हुआ था, तो वह भी शुरू हो सकता है। आपको कोई पुराना मित्र आपसे लंबे समय बाद मिलने आ सकता है। विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के मार्ग प्रशस्थ होंगे। आपका कोई सहयोगी आपको परेशान करने की कोशिश करेगा। आप अपने कामों को कल पर टालने से बचें। यदि आपको कोई शारीरिक समस्या चल रही है, तो उसके लिए आपको कुछ अच्छे डॉक्टर से सलाह मशवरा लेना होगा।*
*मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)*
*आज आपकी वाणी की सौम्यता आपको मान-सम्मान दिलवाएगी। परिवार के सदस्यों के साथ आप कुछ समय व्यतीत करेंगे, जिससे आप अपनी पारिवारिक समस्याओं को भी आसानी से हल कर सकेंगे। एक साथ कई काम हाथ लगने से आपकी व्याकाग्रता बढ़ सकती है। आपके धनधान्य में वृद्धि होने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। आपका सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा और आप अपने परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति भी आसानी से कर सकेंगे। आपको किसी विरोधी की बातों में आने से बचना होगा।*
*कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
*आज का दिन आपके लिए मेहनत से काम करने के लिए रहेगा। वैवाहिक जीवन में खुशियां भरपूर रहेगी। आप लोगों से काम से काम मतलब रखें, तो आपके लिए बेहतर रहेगा। तकनीकी क्षेत्रों में आप अच्छा प्रदर्शन करेंगे। आपको अपने आसपास रह रहे लोगों से थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता है। नौकरी में आपको किसी बड़े पद की प्राप्ति होने से आपका मन काफी खुश रहेगा।*
*सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
*आज का दिन आपके लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। आप अपने ज्ञान को बढ़ाने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देंगे। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को कोई बेहतर अवसर मिल सकता है। प्रेम जीवन जी रहे लोगों में आपसी सामंजस्यता बनी रहेगी। आपको किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। आपके धनधान्य में वृद्धि होने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। आप अपनी जिम्मेदारियां किसी दूसरे पर ना डालें।*
*कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
*आज का दिन आपके लिए मान-सम्मान में वृद्धि लेकर आने वाला है। आपको कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, जिनसे आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। माताजी का कोई पुराना रोग उभरने से आप परेशान रहेंगे। आपकी किसी बात को लेकर आप जीवनसाथी और आपके बीच कहासुनी होने की संभावना थी। आपका कोई काम लंबे समय से अटका हुआ था, तो वह भी पूरा हो सकता है। संतान आपकी उम्मीदों पर खड़ी उतरेगी।*
*तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
*आज का दिन आपके लिए आनंदमय रहने वाला है। आप किसी पार्टी आदि को करने की योजना बना सकते हैं। यदि आपकी कोई प्रिय वस्तु यदि खो गई थी, तो उसके आपको मिलने की पूरी संभावना है। दान-धर्म के कार्यों में आपकी काफी रुचि रहेगी और आप जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आएंगे। आप अपने खर्चो को लेकर थोड़ा समझदारी से चलें, नहीं तो आने वाले समय में आपको धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है।*
*वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
*आज का दिन आपके लिए इनकम के मामले में बढ़िया रहने वाला है। आप अपनी इनकम बढ़ाने से काफी खुश होंगे। पैतृक संपत्ति को लेकर कोई वाद-विवाद भी छिड़ सकता है, जिसमें आप बड़ी सदस्यों की राय के बिना कोई निर्णय सावधान रह कर लें, तो आपके लिए बेहतर रहेगा। जो विद्यार्थी विदेश जाकर शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं, उनकी कोई मन की इच्छा पूरी हो सकती है। संतान पक्ष की ओर से आपको कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है।*
*धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)*
*आज का दिन आपके लिए मिश्रित रूप से फलदायक रहने वाला है। आप अपने करियर में सुधार लाने की कोशिश करेंगे। आप किसी दूसरी नौकरी के लिए अप्लाई कर सकते हैं, लेकिन आपको अपने कामों को लेकर थोड़ा धैर्य व संयम बनाए रखना होगा। परिवार में किसी सदस्य की ओर से आपको कोई निराशाजनक सूचना सुनने को मिल सकती है। आपको अपने किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलने का मौका मिलेगा। ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति से आप कोई लेनदेन सोच समझकर करें।*
*मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)*
*आज का दिन आपके लिए मिलाजुला रहने वाला है। आज आपको अपने कामों को लेकर योजना बनाकर चलना होगा। आप इधर-उधर बैठकर खाली समय व्यतीत ना करें। काम को लेकर आप पिताजी से कोई सलाह ले सकते हैं। आपको बेवजह की भागदौड़ अधिक रहेगी, क्योंकि आप अपने से ज्यादा औरों के कामों पर ध्यान लगाएंगे। आपको अपने पारिवारिक मामलों को लेकर लापरवाही करने से बचना होगा। संतान की पढ़ाई-लिखाई में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए उनके गुरुजनों से बातचीत कर सकते हैं।*
*कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
*आज का दिन आपके लिए आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छा रहने वाला है। आप अपने बिजनेस में छुटपुट लाभ की योजनाओं पर पूरा ध्यान देंगे। आप अपने कीमती सामानों का पूरा ध्यान दें, क्योंकि उनके चोरी होने का भय बना हुआ है। आपकी कुछ खास लोगों से मुलाकात होगी। आप पार्टनरशिप में कोई काम करने की शुरुआत कर सकते हैं। प्रॉपर्टी को लेकर कोई बड़ी डील अटकी हुई थी, तो वह भी फाइनल हो सकती है। आपकी इनकम के सोर्स बढ़ेंगे, जिनसे आपको खुशी होगी और आप अपने काम आसानी से पूरे कर सकेंगे।*
*मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
*आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहने वाला है। आपका परिवार के सदस्यों में समानता बनाकर चलेंगे और अपनी सुख-सुविधाओं की चीजों पर भी अच्छा खासा धन खर्चा करेंगे। आपके धन प्राप्ति के मार्ग खुलेंगे। भाइयों से आप काम को लेकर बातचीत कर सकते हैं। आपको किसी प्रकार का कोई जोखिम लेने से बचना होगा। माताजी की सेहत में उतार-चढ़ाव रहने से आपको थोड़ी टेंशन हो सकती है। आपको नौकरी से संबंधित किसी काम को लेकर कहीं बाहर जाना पड़ सकता है।*
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