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ब्रह्म (परम सत्य) ही सब कुछ का आधार है। जगत् उसके प्रतिबिंब मात्र—जैसे समुद्र की लहरें समुद्र ही हैं, वैसे… READ MORE
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“असतो मा सद्गमय” अर्थात् असत्य (माया या भ्रम) से सत्य (परमात्मा की वास्तविकता) की ओर ले चलो। “तमसो मा ज्योतिर्गमय”… READ MORE
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9431848786:-:-:( समस्त सृष्टि—जो कुछ भी इस जगत में विद्यमान है—सर्वत्र ईश्वर की परम चेतना से व्याप्त है। अर्थात्, हर वस्तु,… READ MORE
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यह दिव्य वाक्य हमें आत्मा की महानता का बोध कराता है। ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का अर्थ है ‘मैं स्वयं ब्रह्म हूँ’।… READ MORE
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जीवन में कोई कमी या अभाव नहीं है—सब कुछ पहले से ही पूर्ण और संपूर्ण है। जैसे अनंत सागर से… READ MORE
“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”
~ Richie Norton
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