Featured

The Latest


  • , ,

    Sanatan Panchang 13032026 Rashifal Samadhan

    “असतो मा सद्गमय” अर्थात् असत्य (माया या भ्रम) से सत्य (परमात्मा की वास्तविकता) की ओर ले चलो। “तमसो मा ज्योतिर्गमय”… READ MORE

  • , ,

    Sanatan Panchang 12032026 Rashifal Samadhan

    9431848786:-:-:( समस्त सृष्टि—जो कुछ भी इस जगत में विद्यमान है—सर्वत्र ईश्वर की परम चेतना से व्याप्त है। अर्थात्, हर वस्तु,… READ MORE

  • , ,

    Sanatan Panchang 11032026 Rashifal Samadhan

    यह दिव्य वाक्य हमें आत्मा की महानता का बोध कराता है। ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का अर्थ है ‘मैं स्वयं ब्रह्म हूँ’।… READ MORE

  • , ,

    Sanatan Panchang 10032026 Rashifal Samadhan

    जीवन में कोई कमी या अभाव नहीं है—सब कुछ पहले से ही पूर्ण और संपूर्ण है। जैसे अनंत सागर से… READ MORE

  • , ,

    Sanatan Panchang 09032026 Rashifal Samadhan

    संस्कृत में उदाहरण (छांदोग्य उपनिषद् ६.८.७): तत् त्वम् असि। (उच्चारण: तत् त्वम् असि) हिंदी अनुवाद: तुम वही हो। सरल शब्दों… READ MORE

Quote of the week

“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”

~ Richie Norton