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यह दिव्य वाक्य हमें आत्मा की महानता का बोध कराता है। ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का अर्थ है ‘मैं स्वयं ब्रह्म हूँ’।… READ MORE
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जीवन में कोई कमी या अभाव नहीं है—सब कुछ पहले से ही पूर्ण और संपूर्ण है। जैसे अनंत सागर से… READ MORE
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संस्कृत में उदाहरण (छांदोग्य उपनिषद् ६.८.७): तत् त्वम् असि। (उच्चारण: तत् त्वम् असि) हिंदी अनुवाद: तुम वही हो। सरल शब्दों… READ MORE
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मान लीजिए कोई दीपक है। उसकी लौ अलग-अलग दिखती है, लेकिन प्रकाश का स्रोत एक ही है। उसी तरह हर… READ MORE
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इस संसार में जो कुछ भी चल-अचल है वह सब परमात्मा से ही आच्छादित है। इसलिए मनुष्य को त्याग और… READ MORE
“Every sunset is an opportunity to reset. Every sunrise begins with new eyes.”
~ Richie Norton
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